वैज्ञानिक विश्लेषण: सवालों का पूछा जाना क्यों जरूरी है?

सारांश यह है कि हम जो हैं, जहां रहते हैं, जिनके बीच जीवन बीतता है, जिस प्रोफेशन में हैं, जो अनचेतन मन में समाहित है, वैसा ही व्यवहार बाहर परिलक्षित होता है. वैसे ही हम खुश या दुखी होते हैं. वैसे ही प्रतिक्रिया व्यक्त करते हैं. वैसे ही दूसरे के विचारों को देखते हैं. वैसे ही किसी बात, घटना, परिस्थिति या सिस्टम पर सवाल करते हैं या नहीं करते बल्कि पूर्णत: विश्वास जताते हैं.

एक बार संयोग से एक साथ एक साधू, एक वनस्पति विज्ञानी और एक लकड़हारा एक सुंदर उपवन में पहुंचे. तीनों लोग उस वन की सुंदरता देखकर बहुत प्रसन्न हुए. वहां अनेक प्रकार की वनस्पति तथा बड़े-बड़े सुंदर छायादार वृक्ष थे. ऐसी सुंदरता देख किसी का भी मन अभीभूत होना स्वाभाविक था. साधू ने सोचा कि कितना अच्छा हो कि यदि कुछ दिन यहीं इन छायादार वृक्षों के नीचे बैठकर साधना की जाए. वनस्पति विज्ञानी कल्पना करने लगा कि इस वन में कुछ दिन रहकर कई नये पौधों और जड़ी-बूटियों को खोज कर प्रकृति और समाज का भला होगा. वहीं लकड़हारा मन ही मन बहुत खुश था कि इस पूरे जंगल को, बड़े-बड़े पेड़ों को काटकर काफी मुनाफा कमाया जा सकता है, जिससे उसका आर्थिक जीवन ही बदल जाएगा.


इस छोटी कहानी कहने का सारांश यह है कि हम जो हैं, जहां रहते हैं, जिनके बीच जीवन बीतता है, जिस प्रोफेशन में हैं, जो अवचेतन मन में समाहित है, वैसा ही व्यवहार बाहर परिलक्षित होता है. वैसे ही हम खुश या दुखी होते हैं. वैसे ही प्रतिक्रिया व्यक्त करते हैं. वैसे ही दूसरे के विचारों को देखते हैं. वैसे ही किसी बात, घटना, परिस्थिति या सिस्टम पर सवाल करते हैं या नहीं करते बल्कि पूर्णत: विश्वास जताते हैं.


Google कंपनी है और इस कंपनी के चेयरमैन ने एक बार कहा था कि Google कंपनी पूरी तरह “सवालों पर चलती है.” एक स्टडी में पाया गया कि अमेजन के जेफ बेजोस और Apple के दिंवगत स्टीव जॉब्स ने हर चीज पर सवाल उठाकर अपनी छाप छोड़ी है. हार्वर्ड बिजनेस रिव्यू और फास्ट कंपनी ने भी रिसर्च में पाया कि सफल व्यवसायी लोगों ने अपने संस्थान में अच्छे सवाल और इनोवेशन की परंपरा को प्रमुखता दी.


अमेरिका में शिक्षकों ने भी माना कि छात्रों के बीच अच्छे प्रश्न करने की पहल विकसित करना महत्वपूर्ण है. क्योंकि अधिकांश स्कूलों में पूछताछ नहीं की जाती है और न ही इसे पुरस्कृत किया जाता है. बल्कि याद करना सिखाया जाता है. इतना ही नहीं, महान विचारक व दार्शनिक सुकरात ने भी समाज और जीवन के लिए सवालों को महत्वपूर्ण बताया था. वैज्ञानिक तो हमेशा से ही सवाल पूछे जाने के समर्थक रहे हैं. अल्बर्ट आइंस्टीन बचपन से ही सभी को हैरान करने वाले सवाल करने लगे थे. चार साल की अवस्था में उन्होंने पूछा था कि कंपास ने उत्तर दिशा की ओर क्यों देखा. बाद में वो दुनिया के महान वैज्ञानिक बने.
एक ताजा स्टडी में पाया गया है कि लगभग चार वर्ष की ब्रिटिश बच्ची अपने पेरेंट्स से प्रतिदिन औसतन 390 सवाल पूछती है.
दूसरी स्टडी में पाया गया कि preschool के बच्चे अपने पेरेंट्स से औसतन 100 प्रश्न प्रतिदिन करते हैं. जबकि वहीं middle school के बच्चे सवाल करना बंद कर देते हैं. और फिर सवाल न करने का सिलसिला अधिकांश लोगों के जीवन का हिस्सा बन जाता है. इसके पीछे कई कारण होते हैं. बच्चा जैसे जैसे वयस्क बनता है और जॉब में आते-आते उसको प्रश्नों के उत्तर मिलने बंद हो जाते. बल्कि परिवार, स्कूल में भी प्रोत्साहन नहीं मिलता और फिर जॉब में आने के बाद कंपनी, समाज व सरकार सवाल करने की इजाजत नहीं देती. कभी आपसे कहा जाता है कि आप सवाल पूछने के लिए उपयुक्त व्यकित नहीं है, कभी बॉस, कभी अथोरिटी, कभी सिस्टम आपको इजाजत नहीं देता किसी प्रकार के सवाल करने की. ये किसी एक समाज या देश की स्थिति नहीं है, कमोबेश सभी देशों का हाल एक जैसा है. लेकिन पश्चिमी देशों के मुकाबले एशियाई देशों की हालत ज्यादा खराब है.


New Mexico के Montessori school में पढ़ चुके कामयाब छात्रों की फेहरिस्त काफी लंबी है जिसमें नोवेल पुरस्कार विजेता से लेकर महान एक्टर, लेखक, व्यावसायी और आविष्कारक हैं. विकिपीडिया के संस्थापक जिमी वेल्स, अमेजन के जेफ बेजोस, गूगल सह-संस्थापक सर्गी ब्रिन और लेरी पेज भी इसी स्कूल के छात्र रहे. याहू की पूर्व प्रमुख मरिसा मेयर सर्गी ब्रिन और लेरी पेज के बार में कहती हैं कि आप Google को तब तक नहीं समझ सकते जब तक आप यह नहीं जानते कि लैरी और सर्गी दोनों मोंटेसरी बच्चे थे. मोंटेसरी स्कूल में आप पेंट करते हैं क्योंकि आपके पास व्यक्त करने के लिए कुछ है या आप बस इसे दोपहर को करना चाहते हैं, इसलिए नहीं कि शिक्षक ने ऐसा करने के लिए कहा है. यह वास्तव में लैरी और सर्गी का समस्याओं को समझने का तरीका था. वे हमेशा पूछते रहते हैं कि ऐसा क्यों होना चाहिए?


नोबेल पुरस्कार विजेता वैज्ञानिक इसिडोर इसाक रबी एक ऐसे बच्चे थे. जब उनके साथी बच्चे स्कूल से घर आते थे तो उनकी माताएं अपने बच्चों से पूछती थीं कि क्या तुमने आज कुछ सीखा. जबकि इसिडोर इसाक रबी की मां अपने बच्चे से पूछती थी, रबी, क्या तुमने आज एक अच्छा सवाल पूछा. हार्वर्ड बिजनेस स्कूल के प्रोफेसर Clayton Christensen कहते हैं कि बच्चों के सवाल करने और जिज्ञासु बनाने में पेरेंट्स बहुत मदद कर सकते हैं.
वैज्ञानिक और आविष्कारक Edwin Land वर्ष 1943 में अपने परिवार के साथ न्यू मैक्सिको में छुट्टियां बिता रहे थे. सर्दियों की सुहानी धूप थी. उन खुशनुमा पलों को कैमरा में कैद कर रहे थे. तभी उनकी उनकी तीन वर्षीय बेटी जेनिफर ने पूछ लिया, डेडी, मैं अपनी फोटो अभी क्यों नहीं देख सकती. इतना इंतजार क्यों? उनके पास इसका कोई उत्तर नहीं था लेकिन उसके बाद तो Edwin Land का जीवन ही बदल गया. छुट्टियों से वापस आए, अपनी लैब में रिसर्च में लग गए और कुछ साल बाद दुनिया के सामने उनका बनाया हुआ पोलरॉइड कैमरा था. जिसे इंस्टेंट कैमरा नाम भी दिया गया.

रोंडा बर्न द्वारा निर्मित द सीक्रेट फिल्म में भी सभी लाइफ कोच और लेखक बार बार एक ही बात कहते हैं कि इस यूनिवर्स से मांगिए, पूछिए कि आप जीवन में क्या चाहते हैं. क्या आप अच्छा स्वास्थ्य चाहते, क्या अच्छी रिलेशनशिप चाहते, क्या अच्छी जॉब चाहते, क्या पैसा चाहते. आप पूछिए और आपको मिलेगा.
जब आप किसी रेस्टोरेंट में खाना खाने जाते हैं तो क्या आप वहां के मेन्यू को सिर्फ देखते हैं या कई सवाल भी करते कि ये है, वो है, कैसा है. शायद आप प्रश्न करते होंगे क्योंकि ये मनुष्य का स्वाभाव है जो कई बार सामने आता ही है.
इतना ही नहीं, ईस्थर और जेरी हिक द्वारा लिखित पुस्तक Ask and It is Given भी तो यही कहती कि आप मांगिए, पूछिए और आपको इस यूनिवर्स से मिल जाएगा.
अमेरिका में एक Right Question Institute है जिसका काम ही है कि सरकारी, गैर-सरकारी, कंपनियों, व्यक्तियों, संस्थानों के लोगों को उचित सवाल करने की ट्रेनिंग देना. इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि सवाल करना और सही सवाल करना कितना जरुरी है.
Quora वेबसाइट की दो बिलियन की वैल्यूएशन है. जो सिर्फ सवाल करने का सोशल मीडिया प्लेटफार्म है. जहां लोग सवाल करते और एक्सपर्ट या संबंधित व्यक्ति वहां सवालों के जवाब देते हैं. यूनिवर्सिटी ऑफ टोरंटो के प्रोफेसर जॉर्डन बी. पीटरसन, जो हावर्ड यूनिवर्सिटी में भी प्रोफेसर रह चुके हैं. पीटरसन वर्ष 2012 से अपने खाली समय में Quora पर लोगों के सवालों के जवाब देते थे. उनके उत्तर लोगों को इतने पसंद आए कि वो एक टेलीविजन प्रोग्राम पर जवाब देने लगे. वहीं से एक दिन प्रकाशक द्वारा पीटरसन को एक किताब लिखने का ऑफर मिला. जिसका नाम है 12 रुल्स ऑफ लाइफ: एन एंटीडोट टू कियॉस


अमेरिका की Defense Advanced Research Projects Agency के पूर्व निदेशक रेजिना दुगन कहती हैं कि कई बार हमें लगता है कि कोई और ज्यादा होशियार है, जानकार है हमारे मुकाबले, पावरफुल है, सक्षम है, स्मार्ट है, समस्या को बेहतर हल कर सकता है, लेकिन ऐसा कुछ होता नहीं है. इसलिए हम अथोरिटी से सवाल नहीं करते.


Ignorance: How It Drives Science पुस्तक के लेखक Stuart Firestein कहते हैं कि एक अच्छा सवाल कई परतों को जन्म दे सकता है. वो सवाल, जवाब के लिए, समाधान के लिए दशकों से लंबित खोजों, समस्याओं के समाधान को प्रेरित कर सकते हैं.
रीड हसटिंग्स को फिल्में देखने का शौक था. जो फिल्म किराए पर लाते थे, उसे वापस करने में अक्सर लेट हो जाते थे. जिससे उन्हें लेट फीस चुकानी पड़ती थी. उन्होंने सवाल किया कि मुझे क्यों लेट फीस भरनी चाहिए और मैं अपनी पत्नी को कैसे समझाउंगा लेट चार्ज. और यहीं से रीड हसटिंग्स ने वीडियो रेंटल हेल्थ क्लव की शुरुआत की. आज की वो मीडिया सर्विस नेटफ्लिक्स है.
हैप्पीनेस प्रोजेक्ट के लेखक ग्रेटचेन रुबिन का कहना है लोगों के लिए समय निकालना मुश्किल हो गया है लेकिन एक बार फिर सोचें और पूछें कि मैं जीवन में क्या चाहता हूं. टेड के संस्थापक रिचर्ड शाऊल वर्मन का मानना है कि जब कोई मदद या समाधान के लिए आए तो अपने दिमाग को खाली कर दो और सिर्फ बुनियादी सवाल करो.
अमेरिका में वर्ष 1954 में अश्वैत महिला रोजा पार्कर का सार्वजनिक परिवहन की बस में सीट से न उठना और सरकार से उस कानून को लेकर सवाल करने पर गिरफ्तारी, अश्वैतों का आंदोलन. फलस्वरुप वहां की सरकार को कानून बदलने पड़े.


फिलहाल मैं इतना ही कहंगा कि आप सामान्य व्यक्ति हों या प्रोफेशनल, सेल्स में हों या मार्केटिंग में, सिस्टम के हिस्सा हों या सिस्टम के बाहर जितना आप सवाल करेंगे, समस्या को अटेंशन देना शुरु करेंगे तो समाधान निकलेंगे. इतना ही नहीं, अगर आप, शिक्षक, प्रोफेसर, सक्षम व्यक्ति, अधिकारी, नेता, मेयर, मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री हैं तो सवालों को आमंत्रित करिए. लोगों को प्रोत्साहित करिए कि वो सवाल करें. सवालों से भागिए नहीं. उचित व सही सवालों से ही दुनिया के आविष्कार हुए. लोगों का जीवन बेहतर बना. वैसे भी कहा गया कि आवश्यकता ही अविष्कार की जननी है. मैं यहां कहूंगा कि आवश्यक और सही सवाल ही जीवन को बदल सकता व खुशहाल बना सकता.

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