Concert

दिल्ली की सर्दी या गर्मी नहीं, बारिश का बखान सुनिये देवांशु झा से

किसी जमाने में दिल्ली की सर्दी कुख्यात रही. यहां तक कि ठंडे मुल्कों के शहरों के मुकाबले भी दिल्ली का इस मामले में तो दबदबा बरसों कायम रहा. दिल्ली जिस तरह देश के तमाम हिस्से से पहुंचने वालों को खुले दिल से पल भर गंवाये बगैर अपना लेती रही, मौसम के मामले में भी बिलकुल वही रवैया अख्तियार किया.

CONCERT में राकेश त्रिपाठी की गुजारिश – ‘कविताओं लौट आओ’

खबरों के धंधे के नित नये बदलते उसूलों के साथ राकेश त्रिपाठी कदम से कदम मिला कर चलते तो रहे लेकिन कविताएं कभी उन्हें भूल नहीं पायीं, न ही वो खुद कविताओं को.

जब यादें मां के आंचल को थामे भागे बचपन को चूमना चाहें

गुजरे हुए हर लम्हे का हिसाब भी तो उन्हीं यादों में सिमटा होता है. हवा का एक झोंका कैसे यादों को झकझोर देता है और मुद्दतों बाद उन्हीं गलियों में घुमाने लगता है जहां कभी जिंदगी के सबसे खूबसूरत लम्हे गुजरे हुए होते हैं.

जमाने के साथ बदलती इंसानी फितरत पर अभिरंजन कुमार की टिप्पणी

अभिरंजन कुमार मनसा-वाचा कवि और कर्मणा कलमकार हैं. बरसों टीवी वर्ल्ड में पर्दे के आगे पीछे सक्रिय रहने के बाद इन दिनों डिजिटल दुनिया में भी खासे एक्टिव नजर आते हैं.

वो पाजी… एक बांसुरी वाला, पंजाब से लेकर Amsterdam नई-नई धुन छेड़े रे…

BALLU FLUTE के शो हर जगह देखने को मिल जाएंगे – चाहे वो कथावाचक मोरारी बापू के प्रवचन का मौका हो, Amsterdam की सड़क हो या फिर उड़ते आसमान में – कोई फ्लाइट हो.

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