सोने ने ₹1 लाख का आंकड़ा कब का पीछे छोड़ दिया है और 31 अगस्त को 24K गोल्ड करीब ₹1.55 लाख/10 ग्राम के आसपास कारोबार कर रहा है।
अब असली सवाल उल्टा है—क्या 2026 में सोना ₹1.7 लाख तक पहुंच सकता है? मौजूदा ग्लोबल संकेत इस संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं करते।
आखिर हुआ क्या?
31 अगस्त को भारतीय बाजार में सोने पर दबाव दिखा और कीमतों में गिरावट आई। Moneycontrol के अनुसार 24K सोना करीब ₹1.55 लाख/10 ग्राम पर था, जबकि MCX अक्टूबर फ्यूचर्स इससे पहले ₹1.56 लाख के आसपास बंद हुआ था।
गिरावट की बड़ी वजह अमेरिका में ब्याज दरों को लेकर बढ़ी टेंशन है। Fed की सख्त नीति से डॉलर और बॉन्ड यील्ड मजबूत होते हैं, जिससे सोने पर दबाव आता है। Reuters के मुताबिक सितंबर में अमेरिकी दर बढ़ने की संभावना बढ़कर 64% तक पहुंच गई है।लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती।
Goldman Sachs Research ने अगस्त में 2026 के अंत तक $4,900 प्रति ट्रॉय औंस का अनुमान दिया है। केंद्रीय बैंकों की खरीद और रिजर्व diversification को इसके पीछे बड़ा सपोर्ट माना गया है।
लेकिन असली असर कहाँ पड़ेगा?
आम भारतीय परिवार के लिए इसका सीधा असर शादी, त्योहार और निवेश बजट पर पड़ेगा।अगर कीमतें ₹1.61.7 लाख के आसपास जाती हैं, तो 10 ग्राम 22K ज्वेलरी की वास्तविक लागत GST और making charges के बाद और ज्यादा हो सकती है।
यानी बेटी की शादी के लिए रखा ₹5 लाख का गोल्ड बजट उतना सोना नहीं खरीद पाएगा, जितना कुछ साल पहले खरीद सकता था।दूसरी तरफ, जिनके पास पहले से सोना है, उनके लिए बढ़ती कीमतें wealth cushion मजबूत कर सकती हैं।
World Gold Council के मुताबिक अगस्त में भारत में investment demand supportive रही और festive season से पहले jewellery demand में भी सुधार के संकेत मिले।यही Gold का बड़ा गेम है—महंगा सोना खरीदार के लिए टेंशन, लेकिन मौजूदा holder के लिए फायदा।
सोशल मीडिया पर लोग क्यों भड़क गए?
एक तरफ निवेशक कह रहे हैं कि geopolitical uncertainty, centralbank buying और कमजोर डॉलर Gold को फिर ऊपर धकेल सकते हैं।
दूसरी तरफ traders सावधान हैं। Fed की संभावित rate hike और मजबूत डॉलर सोने की rally को ब्रेक लगा सकते हैं।
Reuters के अनुसार 31 अगस्त को अंतरराष्ट्रीय Gold करीब $4,429/oz तक फिसला।यानी सोशल मीडिया की बहस साफ है—“₹1.7 लाख अगला target” बनाम “पहले correction आएगा।”
अगले 24 घंटे क्यों महत्वपूर्ण हैं?
अब बाजार की नजर अमेरिकी economic data और Fed के अगले संकेतों पर है।
रोजगार और inflation के आंकड़े यह तय करने में मदद करेंगे कि सितंबर में ब्याज दरों का रुख क्या होगा।अगर ratehike डर कम हुआ और geopolitical tension बनी रही, तो Gold को फिर momentum मिल सकता है।
लेकिन अगर डॉलर और yields तेज हुए, तो profit booking बढ़ सकती है।इसलिए ₹1.7 लाख कोई guaranteed target नहीं, बल्कि मौजूदा परिस्थितियों में bullish scenario है।
3 सवाल जो हर Gold खरीदार पूछ रहा है
Q1. क्या 2026 में सोना ₹1.7 लाख पहुंच सकता है?
हां, इसकी संभावना बाजार विश्लेषणों में दिखाई देती है, लेकिन यह निश्चित भविष्यवाणी नहीं है। Goldman Sachs का 2026end forecast $4,900/oz है।
Q2. क्या अभी पूरा पैसा Gold में लगाना सही है?
एकमुश्त खरीद की बजाय चरणबद्ध निवेश से price volatility का risk कम किया जा सकता है।
Q3. क्या सोना ₹1 लाख से नीचे वापस आ सकता है?
मौजूदा कीमतों को देखते हुए यह बड़ा correction होगा। Fed rates, डॉलर, geopolitical risk और भारतीय demand इसकी दिशा तय करेंगे।
सोने की कहानी अब ₹1 लाख पार करने की नहीं, बल्कि अगले बड़े milestone की है। लेकिन बाजार में कोई target पक्का नहीं होता।
आपके हिसाब से Gold ₹1.7 लाख/10 ग्राम तक जाएगा या पहले बड़ी गिरावट आएगी? कमेंट में अपनी राय बताइए।**